श्री द्वादश महालिंगेश्वर सिद्धमहापीठ, धर्मपुष्प परिवार का एक प्रमुख साधना केंद्र है, जहाँ साधक आत्मिक उन्नति और ईश्वर साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ते हैं। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि निराकार और साकार के अद्भुत संगम का एक जीवंत केंद्र है।
इस सिद्ध महापीठ में ध्यान केंद्र एवं इष्ट दीक्षा महाकेंद्र अपनी दिव्य शक्तियों के साथ प्रतिष्ठित हैं। प्रभु प्रेरित इस स्थल में रुद्राक्ष, अभिमंत्रित यंत्र, स्फटिक, ताड़पत्र, भोजपत्र आदि दिव्य तत्व — आधार, नींव, स्तम्भों और दीवारों में प्रतिष्ठित किए गए हैं।
महालिंगम का महत्व
इसे दिव्य एवं अनन्त शक्तियों का महाकेंद्र माना जाता है, जहाँ दर्शन मात्र से समस्त तीर्थों के समान फल की प्राप्ति होती है।
इसकी स्थापना में भारतवर्ष के मुख्य तीर्थों की रज, विभिन्न कुण्डों, सरोवरों और समुद्रों का जल, तथा 12 ज्योतिर्लिंगों का स्पर्श सम्मिलित है — यही कारण है कि यह सम्पूर्ण भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम बन गया है।
इतिहास और परंपरा
एक दिव्य प्रेरणा और ईश्वरीय आदेश से अंकुरित यह महापीठ —
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26 फरवरी 2009
भगवान शिव ने आचार्य मंजीत को साक्षात् ज्योतिर्लिंग के रूप में दर्शन देकर महापीठ स्थापना का आदेश दिया।
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27 अप्रैल 2009 — अक्षय तृतीया
भूमि-पूजन संपन्न हुआ।
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2009 – 2018
सद्गुरुदेव श्री कमलानंद जी के मार्गदर्शन में सम्पूर्ण भारत के तीर्थों का भ्रमण, रज और जल का संग्रह, 12 ज्योतिर्लिंगों से शिवलिंग स्पर्श।
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18 अप्रैल 2018
विद्वानों द्वारा पूर्ण विधि-विधान के साथ सिद्ध महापीठ की प्रतिष्ठा संपन्न हुई।